जानिये कुंडली में बना रूचक योग कैसे अति शुभ फलदायी है

जानिये कुंडली में बना रूचक योग कैसे अति शुभ फलदायी है ज्योतिषाचार्य सुनील बरमोला जी द्वारा  भारतीय अखंड ज्योतिष विद्या में अनेक शुभ-अशुभ यो

0
928

 जानिये कुंडली में बना रूचक योग कैसे अति शुभ फलदायी है ज्योतिषाचार्य सुनील बरमोला जी द्वारा 

भारतीय अखंड ज्योतिष विद्या में अनेक शुभ-अशुभ योग प्राप्त मिलते हैं और यह योग व्यक्ति को हर मार्ग पर प्रभावित बनाए रखता है बात करते हैं आज कुंडली में बन रहे रुचक योग की? वैदिक ज्योतिष के अनुसार रूचक योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार मंगल यदि किसी कुंडली में लग्न से अथवा चन्द्रमा से केन्द्र के घरों में स्थित हों अर्थात मंगल यदि किसी कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में मेष, वृश्चिक अथवा मकर राशि में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में रूचक योग बनता है जिसका शुभ प्रभाव जातक को शारीरिक बल तथा स्वास्थ्य, पराक्रम, साहस, प्रबल मानसिक क्षमता, समयानुसार उचित तथा तीव्र निर्णय लेने की क्षमता आदि प्रदान कर सकता है तथा अपनी इन विशेषताओं के चलते रूचक योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक ऐसे व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल तथा प्रतिष्ठित देखे जा सकते हैं जिनमें सफलता प्राप्त करने के लिए बताईं गईं विशेषताओं की आवश्यकता हो जैसे कि पुलिस बल, सैन्य बल, खेल प्रतिस्पर्धाएं जैसे क्रिकेट, फुटबाल, टैनिस तथा कुश्ती इत्यादि।

ruchaka yoga
#Astrogurusunilbarmola #yoga

रूचक योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले पुरुष जातक अपने पराक्रम, साहस तथा कार्यकुशलता के चलते अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में बहुत धन तथा प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं तथा इस योग के प्रबल प्रभाव में आने वालीं स्त्रियों में भी पुरुषों जैसे गुण पाये जाते हैं तथा ऐसीं स्त्रियां भी पुरुषों के द्वारा किये जाने वाले साहस के कार्य करके धन तथा ख्याति अर्जित करतीं हैं। दूसरे ग्रहों का प्रभाव आने पर फल में उच्च ता अथवा न्यूखनता देखी जाती है।

 ruchaka yoga
#sunilbarmola #ruchakayoga #astroguru

कुंडली में बने  रुचक योग में अधिकतम फल तब गिनना चाहिए जब बताया गया योग पूरी तरह दोषमुक्तत हो। इन पांचों योगों में अगर मंगल आदि के साथ सूर्य एवं चंद्रमा भी हो तो जातक राजा नहीं होता, केवल उन ग्रहों की दशा में उसे उत्तसम फल मिलते हैं। इन पांच योगों में से यदि किसी की कुण्डतली में एक योग हो तो वह भाग्यशशाली दो हो तो राजा तुल्यत, तीन हो तो राजा, चार हो तो राजाओं में प्रधान राजा और यदि पांचों हो तो चक्रवर्ती राजा होता है। यदि आप अपनी जन्मकुंडली में बन रहे रोचक योग जैसे पंचमहापुरुष योग की जन्मकारी चाहते है तो आप विश्व विख्यात सुनील बरमोला जी से जान सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here